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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का 88वां स्थापना दिवस, कृषक गोष्ठी और पुरस्कार वितरण समारोह

भारतीय कृषि सभी प्रकार की चुनौतियों और विपरीत जलवायु से निपटने में सक्षम-कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री

16th जुलाई 2016,नई दिल्ली

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 88वें स्थापना दिवस और पुरस्कार वितरण समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए भारतीय कृषि को सभी प्रकार की चुनौतियों और मौसम की प्रतिकूलता से जूझने में सक्षम बनाने के लिए वैज्ञानिकों और किसानों के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दोनों के संयुक्त प्रयासों की वजह से वर्ष 2015-16 में मानसून वर्षा में 14 प्रतिशत की कमी के बावजूद खाद्यान्न उत्पादन का स्तर वही बना रहा, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सकी। इससे उन लाखों किसानों की जीविका को भी सुनिश्चित किया जा सका, जो कृषि और संबंधित उद्यमों में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसान कल्याण की कई नई योजनाओं की शुरूआत कर इनका लाभ किसानों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया है, जिससे किसानों की आय को 2022 तक बढ़ाकर दोगुना किया जा सके। इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

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कृषि मंत्री ने कृषि विकास में कृषि शिक्षा की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्नातक स्तर के लिए नए पाठ्यक्रमों को तैयार किया गया है, जिससे छात्रों को परंपरागत, तकनीकी, योग्यता और उद्यमिता विकास के लिए तैयार करके उन्हें कृषि संबंधी चुनौतियों से निपटने के साथ पर्याप्त आय के साधन मुहैया कराए जा सकें। उन्होंने वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे लैब टु लैंड कार्यक्रम को और अधिक तेजी से लागू करें और तकनीकों का अधिक से अधिक व्यवसायीकरण भी करें।

कृषि मंत्री ने वैज्ञानिकों द्वारा सूखा और बाढ़ की परिस्थितियों में पर्याप्त उत्पादन करने में सक्षम दलहन और तिलहन की नई किस्मों को विकसित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए दलहन बीज उत्पादन के हब विभिन्न क्षेत्रों में विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने बागवानी, डेयरी, मछली पालन और पोल्ट्री उत्पादन के लिए अनेक प्रकार की नई तकनीकों के विकास की प्रशंसा की।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री एस.एस. अहलूवालिया, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और पंचायती राज राज्यमंत्री श्री परशोत्तम रूपाला और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री सुदर्शन भगत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि और अन्य गणमान्यों ने भा.कृ.अनु.प. के विभिन्न प्रकाशनों, ज्ञान उत्पादों और नई तकनीकों को जारी किया।

इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्रियों के साथ भा.कृ.अनु.प. के विभिन्न पुरस्कार वितरित किए। इस वर्ष 19 वर्गों में 116 विजेताओं को चुना गया, जिसमें चार संस्थान, दो एआईसीआरपी, 12 केवीके, 73 वैज्ञानिक, 11 किसान और 6 पत्रकार शामिल हैं, इनमें 11 महिला वैज्ञानिक भी सम्मिलित हैं।

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इससे पूर्व, डेयर के सचिव और भा.कृ.अनु. प. के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिषद की उपलब्धियों और योगदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
डेयर के अपर सचिव और भा.कृ.अनु. प. के सचिव श्री छबिलेंद्र राउल ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

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भा.कृ.अनु.प. के शासकीय निकाय, परिषद और कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, परिषद के विभिन्न संस्थानों के निदेशक, विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक और कर्मचारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

भा.कृ.अनु.प. के शासकीय निकाय, परिषद और कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, परिषद के विभिन्न संस्थानों के निदेशक, विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक और कर्मचारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

समारोह के अगले चरण में कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न स्थानों से आए 700 से अधिक किसानों ने भाग लिया और वैज्ञानिकों से विभिन्न तकनीकों तथा योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। डॉ. ए.के. सिंह, उप-महानिदेशक (कृषि प्रसार) और डॉ. जे.एस. संधू, उप-महानिदेशक (फसल विज्ञान) ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की तथा वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ गोष्ठी का संयोजन किया।

(स्त्रोत-भा.कृ.अनु.प.-कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय, नई दिल्ली)