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भाकृअनुप का 86वां स्थापना दिवस एवं पुरस्कार समारोह

प्रधान मंत्री द्वारा कृषकों को अधिक समर्थ और समृद्ध बनाने का आह्वान

29 जुलाई, 2014, नई दिल्ली

भारत के माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नवीन तकनीकों और विज्ञान के माध्यम से देश के कृषकों को अधिक समर्थ और समृद्ध बनाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों का आह्वान किया। श्री मोदी आज यहां भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 86वें स्थापना दिवस एवं पुरस्कार समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने देश के कोटि-कोटि किसानों का अभिनन्दन करते हुए कहा कि तकनीकों को सरल करके कृषक समुदाय के साथ भाषा, परिभाषा और प्रयोगों के माध्यम से जोड़ने की आवश्यकता है। बदलते युग, बदलते परिवेश और बदलते कृषि जलवायु क्षेत्रों के अनुसार विज्ञान एवं तकनीक में भी बदलाव लाना होगा। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि हमें कृषकों को अधिक समर्थ बनाना होगा ताकि वे देश-दुनिया का पेट भर सकें और उनकी जेब भी भरी रहे। वैज्ञानिकों को अपने अनुसंधानों को इस प्रकार ढालना होगा कि किसान इनकी कामयाबी पर भरोसा करके इन्हें सहज रूप से अपना सकें।

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कृषि की वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रति हैक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि हमें कम समय में तैयार होने वाली फसलों का विकास इस तरह करना होगा कि उनकी गुणवत्ता पर कोई आंच न आए। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य और उर्वरता को बेहतर बनाने के लिए पराम्परागत सोच और नयी तकनीकों के संतुलित मेल की जरूरत बताई। पानी के संकट से निपटने के लिए श्री मोदी ने बूंद-बूंद के कुशल उपयोग और जल संग्रह की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा जनचेतना और भागीदारी के समावेश से इस काम में कामयाबी हासिल होगी। श्री मोदी ने पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर दिया और कहा कि इसके लिए विकसित नये वैज्ञानिक उपायों को पशुपालकों तक पहुंचाना चाहिये।

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प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को जल्दी से जल्दी किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों को प्रगतिशील किसानों तथा युवा छात्रों का ‘टैलेंट पूल’ विकसित करके प्रौद्योगिकी का प्रसार करना चाहिये। इसके लिए विश्वविद्यालय अपना कम्युनिटी रेडियो स्थापित कर सकते हैं, जिसमें स्थानीय कृषि समस्याओं के समाधान को प्रस्तुत किया जाये। प्रधान मंत्री ने छात्रों द्वारा सम्पन्न व्यापक अनुसंधान कार्यों को डिजिटल संग्रह के रूप में विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कुछ क्षेत्रों पर विशेष रूप से अनुसंधान और प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया जैसे, दालों और तिलहनों का उत्पादन व गुणवत्ता बढ़ाना, मत्स्य उत्पादन के लिए नीली क्रांति, मोती संवर्धन और औषधीय पौधों की खेती। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने परिषद को शताब्दी वर्ष के लिए विशेष लक्ष्य निर्धारित करने की सलाह दी और कहा कि इस लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता आज से ही खोजना होगा।

प्रधान मंत्री ने राष्ट्रीय कृषि विज्ञान संग्रहालय तथा संक्षिप्त प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

श्री मोदी ने सरदार पटेल आईसीएआर उत्कृष्ट संस्थान पुरस्कार, जगजीवन राम अभिनव किसान पुरस्कार, विविधतापूर्ण कृषि के लिए एन.जी. रंगा कृषक पुरस्कार, कृषि अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए चौधरी चरण सिंह पुरस्कार तथा कृषि विश्वविद्यालयों को विशेष पुरस्कार प्रदान किये।

इससे पूर्व श्री राधा मोहन सिंह, केन्द्रीय कृषि मंत्री समारोह के अध्यक्ष ने प्रधान मंत्री का स्वागत करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की विशेष उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मानसून की रफ्तार को देखते हुए देश के 520 जिलों में आकस्मिक योजनाएं लागू की जा रही हैं, जिन्हें परिषद की ‘निक्रा’ नामक परियोजना के तहत विकसित किया गया है। कृषि प्रसार के काम में परिषद के 639 कृषि विज्ञान केन्द्र कार्य कर रहे हैं तथा बारहवीं योजना में ‘फार्मर फर्स्ट’ नामक पहल की जा रही है। कृषि मंत्री ने इस वर्ष के बजट में कृषि को दिये गये महत्व की सराहना की और आश्वासन दिया कि इन योजनाओं को लागू करने में परिषद की ओर से पूरा सहयोग दिया जायेगा। उन्होंने कृषि शिक्षा, मृदा स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन तथा कृषि विविधीकरण के क्षेत्र में भी परिषद के योगदानों का उल्लेख किया।

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डॉ. संजीव कुमार बालियान, केन्द्रीय कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री एवं समारोह के सम्मानित अतिथि ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद प्रधान मंत्री द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशों का पालन करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

समारोह के क्रम को आगे बढ़ाते हुए मंत्रीगण ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पुरस्कारों का वितरण किया। इस वर्ष 16 विभिन्न वर्गों में 89 पुरस्कार प्रदान किये गये, जिनमें तीन संस्थान, एक एआईसीआरपी, 73 वैज्ञानिक, 10 किसान और दो कृषि पत्रकार शामिल हैं। वैज्ञानिकों में 11 महिला वैज्ञानिक भी हैं।

गणमान्य अतिथियों ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा इसके संस्थानों द्वारा प्रकाशित पुस्ताकों का लोकार्पण किया तथा उत्पादों को जन उपयोग के लिए जारी किया गया।

इससे पूर्व डॉ. एस. अय्यप्पन, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने स्वागत संबोधन के साथ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की उपलब्धियों, योगदानों और भावी दिशा पर जानकारीपूर्ण प्रस्तुति दी।

समारोह में संबंधित विभागों, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं, कृषि विश्वविद्यालयों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक तथा अधिकारी शामिल थे।

(स्रोतः कृषि ज्ञान प्रबंध निदेशालय, भाकृअनुप)